नया नया सा

नया नया सा

कभी कभी यूँ भी होता है, कि सब कुछ नया नया सा लगता है, ऐसी ही अनुभूति को शब्दों में पिरोती कविता...



नया नगर नया काम  
नयी सुबह नयी शाम
नए  नए से पलों  में  
नए दृश्य  अभिराम
नई भाषा नई बोली
नई ध्वनिया अविराम  
नई सी हर अनुभूति है
नई आशाएं अनाम
नवल सी नभ की धवलता
नई सी मन की चपलता
नए नए से सारे ढंग
नया सा लगे प्रिय का संग…

अन्य बतियां | जयोम के मुख से

करवाई हंसी की बौछार | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

हा हा हा ये छोटा सा विदूषक हंसाने में बड़ा माहिर होता जा रहा है. बस, कभी कभी खुद समझ नहीं पाता, कि हम इतनी ज़ोर से क्यों हंस रहे हैं.

मेरा प्यारा नन्हा सुधारक | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

ज़रा गलती कर के तो देखो... कहां हम सोचते थे, कि जयोम की गलतियां सुधारकर उसे अच्छा बोलना सिखाएंगे, यहां तो जनाब दो साल के हुए हैं नहीं और अभी से हमारी गलतियां सुधार रहे हैं

मुझे नींद न आए | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

जब आए तो चलो नींद को भगाएं न सोने के और नींद भगाने के ढेर उपाय हैं जयोम के पास. नींद चाहे अपने सारे हथियार अपना ले, जयोम की आखों में नींद भरी होती है, उबासियां भी आतीं हैं,
पर उसके पास तरीके भी शानदार हैं से दुश्मन से निपटने के.

चीज़ों से बतियां | जयोम के मुख से

जानता नहीं कि जान नहीं बेजान चीज़ें कहां सुनेंगीं जयोम की बातें, पर वो फिर भी उनसे बातें करता है.