दिल को समझाती हूँ मैं...


दिल को समझाती हूँ मैं...

थोड़ा इत्मीनान रखो,
वो दिन भी हुज़ूर आएगा,

खुशनुमा बहेगी हवा
हर तरफ़,
तुम झूम उठोगे
ऐसा सुरूर छाएगा,

ऐसा झिलमिलाएगा
खुशी से हर इक पल,
कि महफिल की शमा का
नूर भी शरमाएगा,

ये शिद्दत से भरी
ख्वाहिशों का असर है,
कभी न कभी देखना
रंग ज़रूर लाएगा...

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जब आए तो चलो नींद को भगाएं न सोने के और नींद भगाने के ढेर उपाय हैं जयोम के पास. नींद चाहे अपने सारे हथियार अपना ले, जयोम की आखों में नींद भरी होती है, उबासियां भी आतीं हैं,
पर उसके पास तरीके भी शानदार हैं से दुश्मन से निपटने के.

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जानता नहीं कि जान नहीं बेजान चीज़ें कहां सुनेंगीं जयोम की बातें, पर वो फिर भी उनसे बातें करता है.