बात बात में

बात बात में...

बात के बारे में कुछ बातें...


बात बात में बात बन जाए,
बात बात में यूँ ही ठन जाए,
जो बैठें बतियाने सखियाँ,
बतियों में कट जाएँ रतियाँ,

ख़ुशी की बात करते हों अगर,
तो सुख की दुगुनी होती उमर,
जो दुःख बाँट लो बतिया कर,
आधा हो जाए बोझा मन भर,

शब्दों में गर कह ना पाएं,
तो अखियाँ बतलाये बात,
फिर भी रह जाए अधूरी तो,
स्पर्श का मिल जाए साथ,

ना बोलें तो फिर भी जी लें,
पर कैसे हो जीना बिना बात,
कभी प्यार की, कभी दुलार की,
बात ही लाये हर सौगात...

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