आया राखी का त्यौहार - रक्षाबंधन के त्यौहार को समर्पित कविता

आया राखी का त्यौहार

रक्षाबंधन की रौनक त्यौहार के कुछ दिन पहले ही से छाने लगती है. मेरी टेबल पर, राखियों का छोटा सा
ढेर लगा है. सारे भाइयों के लिए उनकी पसंद के हिसाब से राखियां ले आई, पर फिर भी कुछ कमी लग
रही थी. तो तस्वीरें ले लीं. फिर भी मन नहीं भरा. सोचा कुछ लिखूं…


रक्षाबंधन की रौनक त्यौहार के कुछ दिन पहले ही से छाने लगती है. मेरी टेबल पर, राखियों का छोटा सा ढेर लगा है. सारे भाइयों के लिए उनकी पसंद के हिसाब से राखियां ले आई, पर फिर भी कुछ कमी लग रही थी. तो तस्वीरें ले लीं. फिर भी मन नहीं भरा. जब राखी पर सब साथ हों, तो उत्साह, रंग, उल्लास की कोई कमी ही नहीं होती. मेरी शादी के बाद की पहली राखी ऐसी ही थी. मेरा भाई, मामा, सारे मौसेरे भाई, बहनें, मेरा छोटा सा भतीजा…


पर इस बार तो सारे भाई दूर हैं. मेरा छोटा भाई तो सात समुंदर पार है. उसे मीठा बहुत पसंद है. और राखी हमारे यहां इतने बड़े परिवार में सुबह से शाम तक मनती है. (सारे ममेरे, मौसेरे, चचेरे आदि रिश्तेदारों के संग) तो वो दिन भर मीठा मुंह रखता था - सबके सामने मम्मा ज़्यादा टोक नहीं पाती थी ना. भाइयों के हाथ पर ढेर सारी राखियां होती थीं. आपस में प्रतियोगिता होती है, किसकी कलाई पर ज्‍़यादा राखियां हैं.


जाने अब कब फिर से साथ त्यौहार मनाने का मौका मिलेगा.

साथ होते हैं, तो बिना लड़े राखी का दिन भी निकालना चुनौती होता है - मम्मा के आग्रह पर हम कोशिश ज़रूर करते हैं. जब हम छोटे थे, तो मेरा भाई मेरे लिए एक बार राखी पर छोटा सा "टेडी बियर" लाया था. वो बाज़ू पर लगाने वाला. उपहार इतना प्यारा था, कि काफी देर तक हमारा झगड़ा नहीं हुआ. अब फोन पर, या स्काइप पर ही कसर पूरी कर पाते है. कहां रोज़ की तूतू-मैंमैं और कहां साल में एक बार मिलना.


अब राखी का त्यौहार आ रहा है, और भाई की बहुत याद आ रही है. मन में उल्लास भी है, पर साथ त्यौहार न मना पाने का मलाल भी. सारे मिश्रित भावों को संजोए बिना मन को चैन कहां? इसलिए सोचा कुछ लिखूं…


रंग बिरंग नग-मनके जड़ी,
राखियां सजी छोटी-बड़ी,
समेटे धागे में स्नेह अपार,
आया राखी का त्यौहार ।।


दुकान भीड़ से अटी पड़ी,
बहन सोचती खड़ी-खड़ी,
भाई को ये वाली भाएगी?
क्या कलाई पर सुहाएगी?
कैसी राखी लें इस बार,
आया राखी का त्यौहार ।।


निहारे घड़ी बंधी कलाई,
स्नेह से मुस्कुराए भाई,
देख कर भड़क जाएगी,
दीदी घड़ी खुलवाएगी,
डांट में भी होगी मनुहार,
आया राखी का त्यौहार ।।


अभी राखी में थोड़े दिन शेष,
पर अभी से रौनक है छाई,
उत्साह से भरा सारा परिवेश,
पर थोड़ी कठिनाई में भाई,
इस बार क्या दूंगा उपहार?
आया राखी का त्यौहार ।।


तकनीक भी है पीछे नहीं,
"अंतरजाल" पर मने त्यौहार,
झट से भेजी विदेश भी,
राखी से "दूरी" मानी हार,
अटूट बंधन ये, गहरा प्यार,
आया राखी का त्यौहार ।।


कोई बहन भाई के संग,
त्यौहार के रंग में मनंग,
कोई लिखकर पंक्ति चार,
रोली टीके के संग प्यार,
भेजे सात समुंदर पार,
आया राखी का त्यौहार ।।

© 2012, UV Associates
All rights reserved

अन्य बतियां | जयोम के मुख से

करवाई हंसी की बौछार | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

हा हा हा ये छोटा सा विदूषक हंसाने में बड़ा माहिर होता जा रहा है. बस, कभी कभी खुद समझ नहीं पाता, कि हम इतनी ज़ोर से क्यों हंस रहे हैं.

मेरा प्यारा नन्हा सुधारक | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

ज़रा गलती कर के तो देखो... कहां हम सोचते थे, कि जयोम की गलतियां सुधारकर उसे अच्छा बोलना सिखाएंगे, यहां तो जनाब दो साल के हुए हैं नहीं और अभी से हमारी गलतियां सुधार रहे हैं

मुझे नींद न आए | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

जब आए तो चलो नींद को भगाएं न सोने के और नींद भगाने के ढेर उपाय हैं जयोम के पास. नींद चाहे अपने सारे हथियार अपना ले, जयोम की आखों में नींद भरी होती है, उबासियां भी आतीं हैं,
पर उसके पास तरीके भी शानदार हैं से दुश्मन से निपटने के.

चीज़ों से बतियां | जयोम के मुख से

जानता नहीं कि जान नहीं बेजान चीज़ें कहां सुनेंगीं जयोम की बातें, पर वो फिर भी उनसे बातें करता है.