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आया राखी का त्यौहार - रक्षाबंधन के त्यौहार को समर्पित कविता

रक्षाबंधन के त्यौहार को समर्पित कविता. .

रंग बिरंग नग-मनके जड़ी,
राखियां सजी छोटी-बड़ी,
समेटे धागे में स्नेह अपार,
आया राखी का त्यौहार,


रक्षाबंधन की रौनक त्यौहार के कुछ दिन पहले ही से छाने लगती है. मेरी टेबल पर, राखियों का छोटा सा ढेर लगा है. सारे भाइयों के लिए उनकी पसंद के हिसाब से राखियां ले आई..

खुशियों का मोल

अनमोल खुशियों का तोलमोल छोडें, इन्हें खरीदना, बेचना, चुराना, छीनना संभव नहीं. बस इनके योग्य बनने का प्रयत्न ही किया जा सकता है... इन्हीं भावों को शब्दों में पिरोती कविता...
नापा न जा सके खुशियों के मोल को
देखा है कभी मुस्कान के तोल को?

छवि देख तिहारी, दुल्हन प्यारी...

अपने भैया की शादी में दुल्हन की छवि का बखान करते लिखी थी ये कविता ...

सच्चे पल, झूठे रिश्ते

सच है कि रिश्ते अनमोल होते हैं. पर जीवन में कई अपवाद भी होते हैं.
दिखावे के रिश्तों के लिए जीवन के अनमोल पल, सच्ची भावनाएं ज़ाया न करें...
इन्हीं भावों को शब्दों में पिरोती कविता... 


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