हिंदी में लिखते समय, मात्राओं पर दें ध्यान

हिंदी में लिखते समय, मात्राओं पर दें ध्यान

पिछले दिनों 'नेट' यानि जाल* पर कई सारे हिंदी लेख नज़र में आये, और बड़ा अच्छा लगा देखकर की लोग अपनी भाषा में लिखना और पढ़ना इतना पसंद कर रहे हैं. कई पाठक टिप्पणियां भी हिंदी में कर रहे हैं.


पर एक बात ज़रा खली, कि मात्राओं पर जितना ध्यान देना चाहिए उतना ध्यान नहीं देते हमारे हिंदी जाल लेखक.  और ऐसा नहीं कि हम मुश्किल शब्दों कि बात कर रहे हों, लाये को लाया दिख दिया है, लिए को लिया बना दिया. व्याकरण में ढेर त्रुटियाँ हैं, जिन्हें पकड़ना कतई मुश्किल नहीं है. हमारे हिसाब से तो लिखने वाले को खुद भी निश्चित ही दिख गया होगा, बस लापरवाही है. जैसे सोच रहे हों कि हिंदी में टिप्पणी लिख कर ऐसा प्रभाव पढ़ेगा कि चाहे कैसी भी हिंदी हो, अच्छी ही लगेगी.

ऐसा नहीं है, हिंदी में लिखते समय भी आपको अपने लेखन के स्तर पर ध्यान देना चाहिए. अब ये कोई ज़रूरी नहीं कि आप शुद्ध हिंदी लिखें, बोलचाल की भाषा के सरल शब्द ही प्रयोग में लायें, लेकिन कोशिश यही रहे कि जो लिखें वो सही हो.

वैसे एक त्रुटी काफी लोगों की देखी, टाइप करते समय भी और लेखन में भी, जो शायद लापरवाही की बजाय अनभिज्ञता के कारण हो. छोटी इ कि मात्रा वाली "कि" और बड़ी ई कि मात्रा वाली "की" का प्रयोग अलग अलग जगह होता है.

जब दो शब्दों के बीच आये तो बड़ी इ वाली "की" लिखें जैसे, 'मयूरी की पुस्तक'.

छोटी इ वाली "कि" का प्रयोग छोटे वाक्यों के बीच करें, जैसे, "मैंने उनसे कहा कि अब मात्रा सुधार लो."

इस लेख से, हम उम्मीद करते हैं, कि हमें एक फायदा होगा. जैसे ही विविध-संकलन के किसी लेख पर कोई त्रुटी दिखाई देगी, कई सारे पाठक हमें बताने को तत्पर होंगे. कुछ सोचेंगे, "ये त्रुटिहीन कार्य करना चाहते हैं," और इसीलिए सुधार करना चाहेंगे. और कुछ मौके की ताक में रहेंगे, "बड़ी त्रुतिहीनता की बातें बना रहे हैं, अब एक गलती होने दो, फिर बताएँगे."

भई, उद्देश्य जो भी हो हमारे कार्य से त्रुटियों का सफाया होता रहे, तो हमारा तो मुनाफ़ा ही है. तो आपसे अनुरोध है, जब भी कोई गलती दिखे, आप बेझिझक हमें बताएँ. यहाँ एक गलती हमने जानबूझ कर की है, आप बताइए कहाँ है? 

* कई लेखक इन्टरनेट को जाल कह रहे हैं, हमें भी नाम काफ़ी पसंद आया. कुछ ने तो अंतरजाल का भी प्रयोग किया है. :)

अन्य बतियां | जयोम के मुख से

करवाई हंसी की बौछार | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

हा हा हा ये छोटा सा विदूषक हंसाने में बड़ा माहिर होता जा रहा है. बस, कभी कभी खुद समझ नहीं पाता, कि हम इतनी ज़ोर से क्यों हंस रहे हैं.

मेरा प्यारा नन्हा सुधारक | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

ज़रा गलती कर के तो देखो... कहां हम सोचते थे, कि जयोम की गलतियां सुधारकर उसे अच्छा बोलना सिखाएंगे, यहां तो जनाब दो साल के हुए हैं नहीं और अभी से हमारी गलतियां सुधार रहे हैं

मुझे नींद न आए | जयोम के मुख से | विविध - संकलन

जब आए तो चलो नींद को भगाएं न सोने के और नींद भगाने के ढेर उपाय हैं जयोम के पास. नींद चाहे अपने सारे हथियार अपना ले, जयोम की आखों में नींद भरी होती है, उबासियां भी आतीं हैं,
पर उसके पास तरीके भी शानदार हैं से दुश्मन से निपटने के.

चीज़ों से बतियां | जयोम के मुख से

जानता नहीं कि जान नहीं बेजान चीज़ें कहां सुनेंगीं जयोम की बातें, पर वो फिर भी उनसे बातें करता है.