मेरे कुछ यादगार फेसबुक स्टेटस संदेश

मेरे कुछ यादगार फेसबुक स्टेटस संदेश

कभी चेहरों की किताब पर साझा किए हुए

फेसबुक पर दोस्तों से कभी विचार बाँटे, कभी कुछ मज़ाक हुए, कभी कोई अनोखी घटना, कुछ प्यारी यादें, तो कभी कोई दिलचस्प कड़ी.

कभी यूँ भी हुआ कि साझा करने लगे, और कुछ नया बन पड़ा… छोटी सी कविता, तुकबंदी या बेसिरपैर की पॅरोडी.

पॅरोडी से याद आया, हमारे छोटे भाई को हमारी सृजनात्मकता का ये रूप कतई नहीं सुहाता. दरअसल छुटपन में बहुतेरा चिड़ाया है ना उसे. :) हर याद ताज़ी होकर अच्छी नहीं लगती.

न उसका चिड़ना बंद होना है, न हमारा चिड़ाना. कुछ कोटे पूरे नहीं होते तो ज़िंदगी अधूरी सी लगती है.

खैर, छोड़िए. हम बात कर रहे थे फेसबुक स्टेटस संदेशों की. हाल ही में एक दिन अपनी "टाइमलाइन" पर कुछ यादगार संदेशों पर नज़र पड़ी. तो सोचा कि ऐसे कुछ यादगार फेसबुक स्टेटस संदेशों को आपसे साझा किया जाए. हर एक के पीछे कुछ कहानी है, थोड़ी कहनी है, थोड़ी आपके अंदाज़े से आगे बहनी है :)

अब घटी तो ये भी थी, आप ही तय कीजिए
घटना या दुर्घटना…

नॉएडा के रैडिसन पर मिला हमको खारा सूप,
उसपर ब्रेड क्रम्ब में भी नमक भरा था कूट-कूट,
बेस्वाद खाना खाकर खूब कोसा बनाने वाले को,
याद किया इंदौर सराफा के जोशी बड़े वाले को...
एक ये फाइव स्टार का कुक है जिससे नमक भी न जाए संभाले,
और एक जोशी जी की चुटकी है, जिसमें से बिखरे पांच मसाले...
१० अगस्त २०११
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कार्यालय में एक खेल प्रतियोगिता थी,
एक व्यक्ति कुछ ज़्यादा ही बाज़ीगर बन रहा था, जीत तो गया,
पर तिया पांचा कर - सबकी नज़रों में गिर कर…

अनजानों के संग जुड़ जाएं जो मन के प्यारे तार,
ऐसी हार पर वार जाऊं मैं जीत कई हज़ार,
खेल भावना कि देखी आज ऐसी बहती धार,
जो हारा सो जीत गया, और जीत बन गई हार.
२२ मार्च २०११
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बारिश का मौसम… किसी को गरमा-गरम पकौड़े याद आते हैं,
तो किसी को अदरक वाली चाय… और मुझको…

नानी घर की पोर्च पर, रिमझिम का लेते हुए मज़ा,
खाते थे भुट्टे गरम, उठकर जाना लगता था सज़ा
आज जो बरसा पानी तो फिर से भुट्टा सेका,
पर कहाँ अकेले खाना और कहाँ साथ सभी का...

... "ए तेरा वाला चखा", "इसका ज्यादा अच्छा है", "मैं और एक खाऊँगी", "अरे बस कर, मत खा और, पेट खराब हो जाएगा" ...

२४ अगस्त २०११
******

अब फेसबुक के स्टेटस संदेशों की पोस्ट हो, और फेसबुक की शान में कुछ ना कहा जाए,
ज़रा अच्छा नहीं लगता…

फेसबुक के नाम की एक चेहरों की किताब है,
इसमें मेरे कुछ दोस्तों के चेहरे लाजवाब हैं,
उन सबके लिए रहे मुबारक नया साल,
ढेरों मिलें खुशियाँ, खूब हो धमाल…
१ जनवरी २०१२

इस बार बस इतना ही, बाकी किस्सा कहते फेसबुक संदेश अगली बार के लिये :)

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